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Ab Uski Yaad Raat Din

Unknown artist
[03:06.17]·Synced by Guest·
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[00:14.78] भले दिनों की बात थी

[00:17.26] भली सी एक शक्ल थी

[00:19.28] ना ये कि हुस्ने ताम हो

[00:21.51] ना देखने में आम सी

[00:23.50] ना ये कि वो चले तो कहकशां सी रहगुजर लगे

[00:27.50] मगर वो साथ हो तो फिर भला भला सफ़र लगे

[00:31.53] कोई भी रुत हो उसकी छब

[00:34.54] फ़जा का रंग रूप थी

[00:36.80] वो गर्मियों की छांव थी

[00:38.78] वो सर्दियों की धूप थी

[00:41.57] ना मुद्दतों जुदा रहे

[00:43.79] ना साथ सुबहो शाम हो

[00:46.54] ना रिश्ता-ए-वफ़ा पे ज़िद

[00:48.80] ना ये कि इज्ने आम हो

[00:51.54] ना ऐसी खुश लिबासियां

[00:53.79] कि सादगी गिला करे

[00:55.78] ना इतनी बेतकल्लुफ़ी

[00:58.04] की आईना हया करे

[01:00.54] ना इखतिलात में वो रम

[01:02.81] कि बदमजा हो ख्वाहिशें

[01:05.05] ना इस कदर सुपुर्दगी

[01:06.78] कि ज़िच करे नवाजिशें

[01:09.25] ना आशिकी ज़ुनून की

[01:11.78] कि ज़िन्दगी अजाब हो

[01:14.05] ना इस कदर कठोरपन

[01:16.30] कि दोस्ती खराब हो

[01:18.56] कभी तो बात भी खफ़ी

[01:21.04] कभी सुकूत भी सुखन

[01:23.81] कभी तो किश्ते ज़ाफ़रां

[01:26.29] कभी उदासियों का बन

[01:29.04] सुना है एक उम्र है

[01:30.79] मुआमलाते दिल की भी

[01:33.04] विसाले-जाँफ़िजा तो क्या

[01:35.29] फ़िराके-जाँ-गुसल की भी

[01:38.04] सो एक रोज क्या हुआ

[01:40.53] वफ़ा पे बहस छिड़ गई

[01:43.54] मैं इश्क को अमर कहूं

[01:45.00] वो मेरी ज़िद से चिढ़ गई

[01:47.29] मैं इश्क का असीर था

[01:49.56] वो इश्क को कफ़स कहे

[01:51.79] कि उम्र भर के साथ को

[01:53.81] वो बदतर अज़ हवस कहे

[01:57.55] शजर हजर नहीं कि हम

[01:59.54] हमेशा पा ब गिल रहें

[02:01.53] ना ढोर हैं कि रस्सियां

[02:03.07] गले में मुस्तकिल रहें

[02:05.28] मोहब्बतें की वुसअतें

[02:07.30] हमारे दस्तो पा में हैं

[02:09.56] बस एक दर से निस्बतें

[02:11.29] सगाने-बावफ़ा में हैं

[02:13.56] मैं कोई पेन्टिंग नहीं

[02:15.04] कि एक फ़्रेम में रहूं

[02:16.82] वही जो मन का मीत हो

[02:18.54] उसी के प्रेम में रहूं

[02:21.03] तुम्हारी सोच जो भी हो

[02:23.26] मैं उस मिजाज की नहीं

[02:25.55] मुझे वफ़ा से बैर है

[02:27.54] ये बात आज की नहीं

[02:29.54] न उसको मुझपे मान था

[02:31.81] न मुझको उसपे ज़ोम ही

[02:34.29] जो अहद ही कोई ना हो

[02:36.79] तो क्या गमे शिकस्तगी

[02:39.29] सो अपना अपना रास्ता

[02:42.06] हंसी खुशी बदल दिया

[02:44.04] वो अपनी राह चल पड़ी

[02:46.05] मैं अपनी राह चल दिया

[02:48.55] भली सी एक शक्ल थी

[02:50.82] भली सी उसकी दोस्ती

[02:53.79] अब उसकी याद रात दिन

[02:56.75] नहीं, मगर कभी कभी

[03:00.51] - 'अहमद फ़राज़'