Shiv Tandav Stotram - PT. Hari Nath
[00:02.86] ।। श्री गणेशाय नमः ।।
[00:29.61] ।। ॐ नमः शिवाय ।। ...३
[00:51.35] जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम् ।
[01:00.63] डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं, चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ।। १ ।।
[01:14.13] जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिम्प निर्झरी, विलो लवी चिवल्लरी विराजमान मूर्धनि ।
[01:23.12] धगद् धगद् धगज्ज्वल्ल ललाट पट्ट पावके किशोर चन्द्र शेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ।। २ ।।
[01:54.90] धरा धरेन्द्र नंदिनी विलास बन्धु बन्धुर स्फूरद् दिगन्त सन्तति प्रमोद मानमानसे ।
[02:04.37] कृपा कटाक्ष धोरणी निरुद्ध दुर्धरापदि क्वचिद् दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ।। ३ ।।
[02:17.62] लता भुजङ्ग पिङ्गल स्फुरत्फणा मणिप्रभा कदम्ब कुङ्कुमद्रव प्रलिप्तदिग्व धूमुखे ।
[02:27.13] मदान्ध सिन्धुर स्फुरत् त्वगुत्तरीयमे दुरे मनो विनोद मद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ।। ४ ।।
[02:48.88] सहस्र लोचनप्रभृत्य शेष लेखशेखर प्रसून धूलिधोरणी विधूस राङ्घ्रि पीठभूः ।
[02:58.62] भुजङ्ग राजमालया निबद्ध जाटजूटक श्रियै चिराय जायतां चकोर बन्धुशेखरः ।। ५ ।।
[03:11.88] ललाट चत्वरज्वलद् धनञ्जय स्फुलिङ्गभा निपीत पञ्चसायकं नमन्निलिम्प नायकम् ।
[03:20.88] सुधा मयूखले खया विराजमानशेखरं महाकपालि सम्पदे शिरोजटालमस्तु नः ।। ६ ।।
[03:52.37] कराल भाल पट्टिका धगद् धगद् धगज्ज्वल द्धनञ्जयाहुती कृतप्रचण्ड पञ्चसायके ।
[04:01.87] धरा धरेन्द्र नन्दिनी कुचाग्र चित्रपत्रक प्रकल्प नैक शिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ।। ७ ।।
[04:15.38] नवीन मेघ मण्डली निरुद्ध दुर्धरस्फुरत् कुहू निशीथि नीतमः प्रबन्ध बद्ध कन्धरः ।
[04:24.38] निलिम्प निर्झरी धरस्तनोतु कृत्ति सिन्धुरः कला निधान बन्धुरः श्रियं जगद् धुरंधरः ।। ८ ।।
[04:46.88] प्रफुल्ल नीलपङ्कज प्रपञ्च कालिम प्रभा वलम्बि कण्ठकन्दली रुचिप्रबद्ध कन्धरम् ।
[04:56.12] स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छि दांध कच्छिदं तमंत कच्छिदं भजे ।। ९ ।।
[05:09.62] अखर्व सर्व मङ्गला कला कदंब मञ्जरी रस प्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम् ।
[05:18.64] स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं गजान्त कान्ध कान्तकं तमन्त कान्तकं भजे ।। १० ।।
[05:50.38] जयत्वदभ्र विभ्रम भ्रमद्भुजङ्ग मश्वस द्विनिर्ग मत् क्रमस्फुरत् कराल भाल हव्यवाट् ।
[05:59.61] धिमि द्धिमि द्धिमि ध्वनन्मृदङ्ग तुङ्गमङ्गल ध्वनिक्रम प्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ।। ११ ।।
[06:13.61] स्पृषद्विचित्र तल्पयो र्भुजङ्ग मौक्ति कस्रजोर्ग गरिष्ठरत्न लोष्ठयोः सुहृद्विपक्ष पक्षयोः ।
[06:22.11] तृष्णारविन्द चक्षुषोः प्रजामही महेन्द्रयोः समप्रवृत्तिकः सदाशिवं भजाम्यहम् ।। १२ ।।
[06:44.62] कदा निलिम्प निर्झरी निकुञ्ज कोटरे वसन् विमुक्त दुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् ।
[06:53.61] विमुक्त लोललोचनो ललामभाल लग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ।। १३ ।।
[07:07.35] इदम् हि नित्यमेव मुक्त मुत्तमोत्तमं स्तवं पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेति संततम् ।
[07:16.86] हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ।। १४ ।।
[07:43.86] पूजा वसान समये दशवक्त्र गीतं यः शंभु पूजन परं पठति प्रदोषे ।
[08:05.86] तस्य स्थिरां रथगजेन्द्र तुरङ्ग युक्तां लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः ।। १५ ।।
[08:34.35] ।। ॐ नमः शिवाय ।।
[08:46.61] इति श्रीरावण कृतम् शिवश ताण्डव स्तोत्रम् सम्पूर्णम्
