Ab mere pass tum aai ho tho kya aai ho
[02:22.93] अब मिरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो
[02:27.18] मैंने माना कि तुम इक पैकर-ए-रानाई हो
[02:31.45] चमन-ए-दहर में रूह-ए-चमन-आराई हो
[02:35.94] तलअत-ए-मेहर हो फ़िरदौस की बरनाई हो
[02:37.68] बिंत-ए-महताब हो गर्दूं से उतर आई हो
[02:41.68] मुझ से मिलने में अब अंदेशा-ए-रुस्वाई है
[02:44.93] मैं ने ख़ुद अपने किए की ये सज़ा पाई है
[02:49.17] ख़ाक में आह मिलाई है जवानी मैंने
[02:51.68] शोला-ज़ारों में जलाई है जवानी मैंने
[02:55.17] शहर-ए-ख़ूबाँ में गँवाई है जवानी मैंने
[02:58.43] ख़्वाब-गाहों में जगाई है जवानी मैंने
[03:01.68] हुस्न ने जब भी इनायत की नज़र डाली है
[03:05.18] मेरे पैमान-ए-मोहब्बत ने सिपर डाली है
[03:08.42] उन दिनों मुझ पे क़यामत का जुनूँ तारी था
[03:10.94] सर पे सर्शारी-ए-इशरत का जुनूँ तारी था
[03:14.17] माह-पारों से मोहब्बत का जुनूँ तारी था
[03:18.18] शहरयारों से रक़ाबत का जुनूँ तारी था
[03:21.93] बिस्तर-ए-मख़मल-ओ-संजाब थी दुनिया मेरी
[03:24.42] एक रंगीन ओ हसीं ख़्वाब थी दुनिया मेरी
[03:28.70] जन्नत-ए-शौक़ थी बेगाना-ए-आफ़ात-ए-सुमूम
[03:32.17] दर्द जब दर्द न हो काविश-ए-दरमाँ मालूम
[03:37.18] ख़ाक थे दीदा-ए-बेबाक में गर्दूं के नुजूम
[03:40.43] बज़्म-ए-परवीं थी निगाहों में कनीज़ों का हुजूम
[03:45.19] लैला-ए-नाज़ बरफ़्गंदा-नक़ाब आती थी
[03:48.17] अपनी आँखों में लिए दावत-ए-ख़्वाब आती थी
[03:51.93] संग को गौहर-ए-नायाब-ओ-गिराँ जाना था
[03:55.18] दश्त-ए-पुर-ख़ार को फ़िरदौस-ए-जवाँ जाना था
[03:58.68] रेग को सिलसिला-ए-आब-ए-रवाँ जाना था
[04:02.68] आह ये राज़ अभी मैं ने कहाँ जाना था
[04:05.93] मेरी हर फ़तह में है एक हज़ीमत पिन्हाँ
[04:09.92] हर मसर्रत में है राज़-ए-ग़म-ओ-हसरत पिन्हाँ
[04:13.18] क्या सुनोगी मिरी मजरूह जवानी की पुकार
[04:17.18] मेरी फ़रियाद-ए-जिगर-दोज़ मिरा नाला-ए-ज़ार
[04:21.68] शिद्दत-ए-कर्ब में डूबी हुई मेरी गुफ़्तार
[04:25.92] मैं कि ख़ुद अपने मज़ाक़-ए-तरब-आगीं का शिकार
[04:29.43] वो गुदाज़-ए-दिल-ए-मरहूम कहाँ से लाऊँ
[04:32.93] अब मैं वो जज़्बा-ए-मासूम कहाँ से लाऊँ
[04:36.68] मेरे साए से डरो तुम मिरी क़ुर्बत से डरो
[04:39.68] अपनी जुरअत की क़सम अब मेरी जुरअत से डरो
[04:42.43] तुम लताफ़त हो अगर मेरी लताफ़त से डरो
[04:46.68] मेरे वादों से डरो मेरी मोहब्बत से डरो
[04:50.18] अब मैं अल्ताफ़ ओ इनायत का सज़ा-वार नहीं
[04:56.42] मैं वफ़ादार नहीं हाँ मैं वफ़ादार नहीं
[04:58.93] अब मिरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो
