y2mate.com - Aigiri Nandini _ Mahishasura Mardini Stotram _ Armonian
[00:12.99] अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दि नुते
[00:19.49] गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते।
[00:26.25] भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
[00:32.51] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१॥
[00:39.54] सुरवर वर्षिणि दुर्धर धर्षिणि दुर्मुख मर्षिणि हर्षरते
[00:47.26] त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिष मोषिणि घोषरते।
[00:52.98] दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते
[00:59.84] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥२॥
[01:21.00] अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रिय वासिनि हासरते
[01:26.26] शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमालय शृङ्गनिजालय मध्यगते।
[01:33.06] मधुमधुरे मधुकैटभ गञ्जिनि कैटभ भञ्जिनि रासरते
[01:39.51] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥३॥
[01:46.25] अयि शतखण्ड विखण्डित रुण्ड वितुण्डित शुंड गजाधिपते
[01:53.02] रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते।
[01:59.51] निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते
[02:06.30] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥४॥
[02:26.26] अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते
[02:32.77] चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते।
[02:39.51] दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते
[02:46.04] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥५॥
[02:53.01] अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे
[02:59.53] त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे।
[03:06.48] दुमिदुमितामर धुन्दुभिनाद महोमुखरीकृत दिङ्मकरे
[03:13.00] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥६॥
[03:26.25] अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते
[03:32.80] समरविशोषित शोणितबीज समुद्भव शोणित बीजलते।
[03:39.78] शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते
[03:46.25] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥७॥
[03:53.29] धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके
[03:59.50] कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके।
[04:06.25] कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके
[04:13.51] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥८॥
[04:33.02] जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते
[04:39.48] झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुर शिञ्जितमोहित भूतपते।
[04:46.26] नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते
[04:53.00] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥९॥
[04:59.77] अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते
[05:06.26] श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते।
[05:12.75] सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते
[05:19.49] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१०॥
[05:39.75] सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते
[05:46.25] विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते।
[05:53.02] शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते
[05:59.50] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥११॥
[06:06.49] अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपते
[06:12.98] त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते।
[06:19.77] अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते
[06:26.25] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१२॥
[06:46.26] कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते
[06:53.00] सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले।
[06:59.48] अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले
[07:06.26] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१३॥
[07:13.24] करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते
[07:19.49] मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते।
[07:26.27] निजगुणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले
[07:33.00] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१४॥
[07:46.23] कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचे
[07:52.76] प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे।
[07:59.51] जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे
[08:06.25] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१५॥
[08:12.99] विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते
[08:19.49] कृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते।
[08:26.23] सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते
[08:33.02] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१६॥
[08:54.00] पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे
[08:59.49] अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत्।
[09:06.01] तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
[09:12.77] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१७॥
[09:19.75] कनकलसत्कल सिन्धुजलैरनु षिञ्चतितेगुण रङ्गभुवम्
[09:26.26] भजति स किं न शचीकुचकुम्भ तटीपरिरम्भ सुखानुभवम्।
[09:33.01] तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम्
[09:39.75] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१८॥
[09:59.74] तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते
[10:06.25] किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते।
[10:13.01] मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
[10:19.72] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१९॥
[10:26.49] अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे
[10:42.00] अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते।
[10:42.51] यदुचितमत्र भवत्युररी कुरुतादुरुता पमपाकुरुते
[10:46.49] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥२०॥
[10:55.26] ।।श्री आदिशंकराचार्य विरचित् दुर्गा स्तुति।।
