कहीं बेख़याल होकर,
[00:01.37] Movie/Album: तीन देवियाँ (1965)
[00:07.37] Music By: एस.डी.बर्मन
[00:10.13] Lyrics By: मजरूह सुल्तानपुरी
[00:13.12] Performed By: मो.रफ़ी
[00:20.62] कहीं बेख़याल होकर, यूँ ही छू लिया किसी ने
[00:58.12] कई ख़्वाब देख डाले, यहाँ मेरी बेख़ुदी ने
[01:09.12] कहीं बेख़याल होकर...
[01:41.12] मेरे दिल में कौन है तू, के हुआ जहाँ अन्धेरा
[02:02.37] वहीं सौ दीये जलाये, तेरे रुख़ की चाँदनी ने
[02:13.12] कई ख़्वाब देख...
[02:26.37] कहीं बेख़याल होकर...
[02:49.88] कभी उस परी का कूचा, कभी इस हसीं की महफ़िल
[03:10.88] मुझे दर-ब-दर फिराया, मेरे दिल की सादग़ी ने
[03:21.38] कई ख़्वाब देख...
[03:34.63] कहीं बेख़याल होकर...
[03:54.88] है भला सा नाम उसका, मैं अभी से क्या बताऊँ
[04:17.87] किया बेक़रार अक्सर, मुझे एक आदमी ने
[04:28.12] कई ख़्वाब देख...
[04:40.62] कहीं बेख़याल होकर...
[05:01.62] अरे मुझपे नाज़ वालों, ये नयाज़मन्दियाँ क्यों
[05:22.87] है यही करम तुम्हारा, तो मुझे न दोगे जीने
[05:32.37] कई ख़्वाब देख...
[05:45.37] कहीं बेख़याल होकर...
