Mahishasurmardini Stotram
[00:15.23] अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
[00:22.98] गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।
[00:30.24] भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
[00:37.73] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥
[00:49.73] सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
[00:56.98] त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते
[01:04.73] दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते
[01:12.50] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥
[01:23.73] अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते
[01:31.23] शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते ।
[01:38.99] मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते
[01:46.73] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥
[01:57.99] अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपते
[02:05.74] रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते ।
[02:13.23] निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते
[02:20.73] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥
[02:32.23] अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते
[02:39.74] चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते ।
[02:47.48] दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते
[02:54.98] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥
[03:06.74] अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे
[03:14.24] त्रिभुवनमस्तक शूलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शूलकरे ।
[03:21.73] दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे
[03:29.47] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥
[03:40.99] अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते
[03:48.49] समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते ।
[03:55.98] शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते
[04:03.73] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७ ॥
[04:15.23] धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके
[04:22.73] कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके ।
[04:30.49] कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके
[04:37.99] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥
[04:49.49] सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते
[04:56.98] कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते ।
[05:04.49] धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर मृदंग निनादरते
[05:12.23] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥
[05:23.73] जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते
[05:31.23] झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते ।
[05:38.98] नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते
[05:46.48] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥
[05:57.98] अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते
[06:05.48] श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते ।
[06:13.23] सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते
[06:20.73] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११ ॥
[06:32.48] सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते
[06:39.73] विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते ।
[06:47.49] शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते
[06:55.24] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १२ ॥
[07:06.49] अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपते
[07:13.95] त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते ।
[07:21.71] अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते
[07:29.47] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १३ ॥
[07:40.97] कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते
[07:48.22] सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले ।
[07:55.97] अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले
[08:03.72] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १४ ॥
[08:15.23] करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते
[08:22.73] मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते ।
[08:30.46] निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले
[08:37.97] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १५ ॥
[08:49.47] कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचे
[08:56.98] प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे
[09:04.47] जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे
[09:12.22] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १६ ॥
[09:23.73] विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते
[09:31.22] कृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते ।
[09:38.97] सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते ।
[09:46.48] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १७ ॥
[09:57.97] पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे
[10:05.47] अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् ।
[10:12.97] तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
[10:20.72] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १८ ॥
[10:32.23] कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम्
[10:39.72] भजति स किं न शचीकुचकुम्भतटीपरिरम्भसुखानुभवम् ।
[10:47.49] तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम्
[10:54.96] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १९ ॥
[11:06.47] तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते
[11:13.97] किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते ।
[11:21.72] मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
[11:29.23] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २० ॥
[11:40.72] अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे
[11:48.48] अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते ।
[11:55.72] यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते
[12:03.73] जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २१ ॥
